अंडा उत्पादन करने वाले पोल्ट्री फार्मर के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। पोल्ट्री फार्म में अब सिर्फ अंडा उत्पादन ही नहीं होगा, बल्कि गैस भी बनेगी। पोल्ट्री फार्मर उस गैस को इस्तेमाल करने के साथ ही बेच भी सकेंगे। इतना ही नहीं, पोल्ट्री फार्म की जरूरत के लिए बिजली भी पोल्ट्री फार्म में ही तैयार हो सकेगी। इसी को देखते हुए पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (PFI) का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्री से मिला। वहीं विभाग के दूसरे अफसरों से भी मुलाकात कर पोल्ट्री फार्मर की मांग रखी है। साथ ही भरोसा दिलाया कि ऐसा होने से पर्यावरण में भी सुधार आएगा।

फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने पोल्ट्री फार्म में कुछ बदलाव लाने और पोल्ट्री फार्मर की इनकम बढ़ाने के लिए सब्सिडी की मांग की है। वहीं, इस मौके पर PFI ने केंद्रीय मंत्री और विभाग के अफसरों को 23–24 सितंबर 2026 को कोच्चि (केरल) में होने वाली PFI की 37वीं वार्षिक आम सभा (AGM) के लिए आमंत्रित किया।

PFI ने मंत्री के सामने रखीं ये बातें

PFI के प्रेसिडेंट रणपाल ढांडा का कहना है कि मौजूदा वक्त में बायोगैस प्लांट पर 20 फीसद से भी कम सब्सिडी प्लांट लगाने के लिए पर्याप्त नहीं है। अगर सरकार चाहती है कि पर्यावरण सुधार की दिशा में बड़े कदम उठाए जाएं तो सरकार को चाहिए कि वह सब्सिडी को बढ़ाकर 60 फीसद तक कर दे। इसके लिए किसान आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित हो सकेंगे।

वहीं, रणपाल ढांडा का यह भी कहना था कि पोल्ट्री फार्मों में सौर ऊर्जा प्रणाली लगाने के लिए भी सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी को बढ़ाकर 50 फीसद किया जाए।

ऐसा करने से किसानों की उत्पादन लागत कम होगी और वे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में ज्यादा से ज्यादा सहयोग करेंगे। वहीं, पोल्ट्री फार्म इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी एक और मांग करते हुए उन्होंने सरकार से मांग की है कि 10 हजार पक्षियों तक के छोटे ब्रॉयलर किसानों को भी सरकार की ओर से सहायता दी जाए। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता योजनाओं का लाभ पोल्ट्री फार्मर को दिया जाए। इन किसानों को भी 50 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी तथा ऋण पर ब्याज अनुदान (Interest Subvention) जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, जिससे वे आधुनिक पोल्ट्री की ओर बढ़ें।

गैस प्लांट से दूर होगी लिटर की परेशानी

रणपाल ढांडा ने बताया कि अगर केंद्र सरकार पोल्ट्री फार्मर को हर संभव मदद करती है तो पोल्ट्री फार्म से लिटर (मुर्गी की बीट) की परेशानी खत्म हो जाएगी। आसपास की हवा भी साफ और स्वच्छ हो जाएगी। क्योंकि प्लांट लगने के बाद लिटर से गैस बनने लगेगी। गैस बनने के बाद जो बचेगा, वह खाद में इस्तेमाल हो जाएगा।

PFI के प्रतिनिधिमंडल में संजीव गुप्ता, उपाध्यक्ष, रविंदर सिंह संधू, सचिव, रिकी थापर, संयुक्त सचिव आदि थे।